ॐ श्री साई नाथ महाराज की जय
साई नाथ महाराज की कृपा से आज इस ब्लॉग की शुरुरात हो रही है.
भारतीय संस्कृति में धर्म और आध्यात्मिकता एक महत्वपूर्ण स्थान है। देश पिछले कई शताब्दियों से अपनी आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है। एक दार्शनिक और धर्मविज्ञानी आदि शंकराचार्य, अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को मजबूत करने और हिंदू धर्म में विचारों के मुख्य धाराओं को एकजुट करने और स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। बौद्ध धर्म में प्राथमिक व्यक्ति गौतम बुद्ध, ऋषि थे, जिनकी शिक्षा बौद्ध धर्म के धर्म की स्थापना की गई थी। कुछ हिंदुओं ने गौतम को विष्णु के 9वें अवतार के रूप में माना। महावीर, जिसे वर्धमान भी कहा जाता है, 24 वें और आखिरी तीर्थंकर थे, जो जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। उन्होंने जैन दर्शन को पढ़ाने के लिए तीन दशकों तक पूरे दक्षिण एशिया में यात्रा की। 15 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में गुरु नानक देवजी उभरे जो सिख धर्म के संस्थापक पैगंबर और दस सिख गुरुओं में से पहला बन गया। उन्हें "हर समय के सबसे महान धार्मिक नवप्रवर्तनकों में से एक" कहा जाता है। रामकृष्ण परमहंस, एक युवा युग से आध्यात्मिक उत्साह के लिए एक प्राकृतिक रहस्यवादी, 19वीं शताब्दी के दौरान एक प्रभावशाली भारतीय रहस्यवादी और योगी के रूप में माना जाता था। ओशो रजनीश, करतर सिंह झाबबर, और मौलाना सैयद सिब्त हसन नकवी 20 वीं शताब्दी के जाने-माने आध्यात्मिक और धार्मिक नेता थे। यह अनुभाग आपको प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक और धार्मिक नेताओं के जीवन और कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
आज हम शुरू करेंगे साई नाथ महाराज की जीवन काल के कुछ प्रसंगो से एवं उनकी शिक्षा से
Today we will start some of the events of SaiNath Maharaj life and his education
भारतीय संस्कृति में धर्म और आध्यात्मिकता एक महत्वपूर्ण स्थान है। देश पिछले कई शताब्दियों से अपनी आध्यात्मिकता के लिए जाना जाता है। एक दार्शनिक और धर्मविज्ञानी आदि शंकराचार्य, अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को मजबूत करने और हिंदू धर्म में विचारों के मुख्य धाराओं को एकजुट करने और स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। बौद्ध धर्म में प्राथमिक व्यक्ति गौतम बुद्ध, ऋषि थे, जिनकी शिक्षा बौद्ध धर्म के धर्म की स्थापना की गई थी। कुछ हिंदुओं ने गौतम को विष्णु के 9वें अवतार के रूप में माना। महावीर, जिसे वर्धमान भी कहा जाता है, 24 वें और आखिरी तीर्थंकर थे, जो जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। उन्होंने जैन दर्शन को पढ़ाने के लिए तीन दशकों तक पूरे दक्षिण एशिया में यात्रा की। 15 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में गुरु नानक देवजी उभरे जो सिख धर्म के संस्थापक पैगंबर और दस सिख गुरुओं में से पहला बन गया। उन्हें "हर समय के सबसे महान धार्मिक नवप्रवर्तनकों में से एक" कहा जाता है। रामकृष्ण परमहंस, एक युवा युग से आध्यात्मिक उत्साह के लिए एक प्राकृतिक रहस्यवादी, 19वीं शताब्दी के दौरान एक प्रभावशाली भारतीय रहस्यवादी और योगी के रूप में माना जाता था। ओशो रजनीश, करतर सिंह झाबबर, और मौलाना सैयद सिब्त हसन नकवी 20 वीं शताब्दी के जाने-माने आध्यात्मिक और धार्मिक नेता थे। यह अनुभाग आपको प्रसिद्ध भारतीय आध्यात्मिक और धार्मिक नेताओं के जीवन और कार्यों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
आज हम शुरू करेंगे साई नाथ महाराज की जीवन काल के कुछ प्रसंगो से एवं उनकी शिक्षा से
Religion and spirituality hold a significant place in Indian culture. The nation has been known for its spirituality from the past several centuries. Adi Shankara, a philosopher and theologian, is known for consolidating the doctrine of Advaita Vedanta and unifying and establishing the main currents of thought in Hinduism. Gautama Buddha, the primary figure in Buddhism, was a sage on whose teachings the religion of Buddhism was founded. Some Hindus regard Gautama as the 9th avatar of Vishnu. Mahavira, also known as Vardhamana, was the 24th and last tirthankara, a significant figure in Jainism. He traveled all over South Asia for three decades to teach Jain philosophy. In the late 15th century emerged Guru Nanak who became the founder Prophet of Sikhism and the first of the ten Sikh Gurus. He has been called "one of the greatest religious innovators of all time". Ramakrishna Paramahamsa, a natural mystic given to spiritual ecstasies from a young age, was regarded as an influential Indian mystic and yogi during the 19th-century. Osho Rajneesh, Kartar Singh Jhabbar, and Maulana Syed Sibte Hasan Naqvi were well-known spiritual and religious leaders of the 20th century. This section provides you information about the life and works of famous Indian spiritual & religious leaders....
Today we will start some of the events of SaiNath Maharaj life and his education
साई नाथ महाराज या साईनाथ भगवान भक्तो के लिए वो पूर्ण प्रभु अवतार है उनके जीवन से हमे :उनके मूल मंत्र 'श्रद्धा एवं सबुरी' का महावाक्य मिला है.बाबा के पूर्ण जीवन काल मैंने आसक्ति से दूर रहने की शिक्षा प्रदान की है. उनके द्वारा कहा गे की आसक्ति मोह द्वार है और मोह तृष्णा एवं जनम मरण के लिए.
साई बाबा (Sai Baba ) का जन्म 28 सितम्बर 1835 को महाराष्ट्र के पथरी गाँव में हुआ था | साईं बाबा के माता पिता और बचपन की इतिहास में कोई जानकारी नही है | उनके बारे में पहली जानकारी साईं सत्चरित्र किताब में शिरडी गाँव से प्राप्त होती है | Shirdi Sai Baba साईं बाबा 16 वर्ष की उम्र में अहमदनगर जिले के शिरडी गाँव में पहुचे | यहा पर उन्होंने एक नीम के पेड़ के नीचे आसन में बैठकर तपस्वी जीवन बिताना शुरू कर दिया | जब गाँव वालो ने उन्हें देखा तो वो चौंक गये क्योंकि इतने युवा व्यक्ति को इतनी कठोर तपस्या करते हुए उन्होंने पहले कभी नही देखा | वो ध्यान में इतने लींन थे कि उनको सर्दी , गर्मी और बरसात का कोई एहसास नही हो रहा था |
साई बाबा (Sai Baba ) का जन्म 28 सितम्बर 1835 को महाराष्ट्र के पथरी गाँव में हुआ था | साईं बाबा के माता पिता और बचपन की इतिहास में कोई जानकारी नही है | उनके बारे में पहली जानकारी साईं सत्चरित्र किताब में शिरडी गाँव से प्राप्त होती है | Shirdi Sai Baba साईं बाबा 16 वर्ष की उम्र में अहमदनगर जिले के शिरडी गाँव में पहुचे | यहा पर उन्होंने एक नीम के पेड़ के नीचे आसन में बैठकर तपस्वी जीवन बिताना शुरू कर दिया | जब गाँव वालो ने उन्हें देखा तो वो चौंक गये क्योंकि इतने युवा व्यक्ति को इतनी कठोर तपस्या करते हुए उन्होंने पहले कभी नही देखा | वो ध्यान में इतने लींन थे कि उनको सर्दी , गर्मी और बरसात का कोई एहसास नही हो रहा था |
दिन में उनके पास कोई नही होता और रात को वो किसी से नही डरते थे |उनकी इस
कठोर तपस्या ने गाँववालो का ध्यान उनकी ओर खीचा और कई धार्मिक लोग नियमित
उनको देखने आते थे | कुछ लोग उनको पागल कहकर उन पर पत्थर फेंकते थे | साईं
बाबा एक दिन अचानक गाँव से चले गये और किसी को पता नही चला | वो तीन वर्ष
तक शिरडी में रहे और उसके बाद शिरडी से गायब हो गये | उसके बाद एक साल बाद
वो फिर शिरडी लौटे और हमेशा के लिए वहा बस गये |
1858 में साईं बाबा Shirdi Sai Baba फिर शिरडी लौटे | इस बार उन्होंने वेशभूषा का अलग तरीका अपनाया जिसमे उन्होंने घुटनों तक एक कफनी बागा और एक कपड़े की टोपी पहन रखी थी | उनके एक भक्त रामगिर बुआ ने बताया कि जब वो शिरडी आये तब उन्होंने खिलाड़ी की तरह कपड़े और कमर तक लम्बे बाल थे जिन्होंने उसे कभी नही कटवाए | उनके कपड़ो को देखकर वो सूफी संत लग रहे थे जिसे देखकर गाँव वालो ने उन्हें मुस्लिम फकीर समझा | इसी कारण एक हिन्दू गाँव होने के कारण उनका उचित सत्कार नही किया गया था |
लगभग 5 वर्षो तक वो नीम के पेड़ के नीचे रहे और अक्सर लम्बे समय तक शिरडी के पास के जंगलो में घूमते रहते थे | वो किसी से ज्यादा बोलते नही थे क्योंकि उन्होंने लम्बे समय तक तपस्या की थी |अंततः उन्होंने एक जर्जर मस्जिद को अपना घर बनाया और एकाकी जीवन बिताने लगे | वहा पर बैठने से आने जाने वाले लोग उनको भिक्षा दे देते थे जिससे उनका जीवन चल जाता था |उस मस्जिद में उन्होंने एक धुनी जलाई जिससे निकली राख को उनसे मिलने वालो को देते थे | ऐसा माना जाता है कि उस राख में चिकत्सीय शक्ति थी |
वो अब गाँव वालो के लिए एक हकीम बन गये थे जो राख से उनकी बीमारी दूर करते थे | Shirdi Sai Baba साईं बाबा उनसे मिलने वालो को आध्यात्मिक शिक्षा भी देते थे और उन्हें पवित्र हिन्दू ग्रंथो के साथ कुरान भी पढने को कहते थे |वो ईश्वर के अटूट स्मरण के लिए अपरिहार्यता के लिए प्रेरित करते और अक्सर गुप्त तरीको दृष्टान्तों, प्रतीक और रूपक से खुद को व्यक्त करते थे | 1910 ईस्वी के बाद साईं बाबा की प्रसिधी मुंबई तक फ़ैल गयी | अनेक लोग उनसे मिलने आने लगे क्योंकि उनके चमत्कारी तरीको की कारण उन्हें संत मानते थे |
Shirdi Sai Baba साईं बाबा ने “सबका मालिक एक ” का नारा दिया था जिससे हिन्दू मुस्लिम सदभाव बना रहे | उन्होंने अपने जीवन में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मो का अनुसरण किया | वो अक्सर कहा करते थे “मुझ पर विशवास करो , तुम्हारी प्रार्थना का उत्तर दिया जाएगा ” | वो हमेशा अपनी जबान पर “अल्लाह मालिक ” बोलते रहते थे |
Shirdi Sai Baba साईं बाबा ने अपने पीछे ना कोई आध्यात्मिक वारिस और ना कोई अनुयायी छोड़ा | इसके अलावा उन्होंने कई लोगो के अनुरोध के बावजूद किसी को दीक्षा दी | उनके कुछ अनुयायी अपने आध्यात्मिक पहचान की वजह से प्रसिद्ध हुए जिनमे सकोरी के उपासनी महाराज का नाम आता है | साईं बाबा की मृत्यु 15 अक्टूबर 1918 को शिरडी गाँव में ही हुयी | मृत्य के समय उनकी उम्र 83 वर्ष थी |Shirdi Sai Baba साईं बाबा की मृत्यु के बाद उनके भक्त उपासनी महाराज को प्रतिदिन आरती सौपते थे जब भी वो शिरडी आते थे |
Shirdi Sai Baba शिरडी साईं बाबा आंदोलन 19वी सदी में शुरू हुआ जब वो शिरडी रहते थे |एक स्थानीय खंडोबा पुँजारी म्हाल्सप्ति उनका पहला भक्त था | 19 वी सदी तक साईं बाबा के अनुयायी केवल शिरडी और आस पास के गाँवों तक ही सिमित थे | Shirdi Sai Baba साईं बाबा का पहला मन्दिर भिवपुरी में स्तिथ है |शिरडी साईं बाबा के मंदिर में प्रतिदिन 20000 श्रुधालू आते है और त्योहारों के दिनों में ये संख्या एक लाख तक पहुच जाती है | Shirdi Sai Baba शिरडी साईं बाबा को विशेषत : महराष्ट्र , उडीसा . आंध्रप्रदेश , कर्नाटक , तमिलनाडु और गुजरात में पूजा जाता है |2012 में एक अज्ञात श्रुधालू ने पहली बार 11.8 करोड़ के दो कीमती शिरडी मन्दिर में चढाये जिसको बाद में साईं बाबा ट्रस्ट के लोगो ने सबको बताया | शिरडी साईं बाबा के भक्त पुरे विश्व में फैले हुए है |
Shirdi Sai Baba Miracles in hindi
पानी से दिया जलाना Lighting lamps with water
Shirdi Sai Baba साईं बाबा को उनकी मस्जिद और दुसरे मन्दिरों में दिया जलाने का बहुत शौक था लेकिन तेल के लिए उनको वहा के बनियों पर आश्रित रहना पड़ता था | वो प्रत्येक शाम को दिया जलाते और बनियों से दान ले जाते | बनिये साईं बाबा को मुफ्त का तेल देकर थक गये थे और एक दिन उन्होंने साईं बाबा से माफी मांगते हुए तेल देने से मना कर दिया और कहा कि उनके पास तेल नही बचा | बिना किसी विरोध के साईं बाबा वापस अपने मस्जिद में लौट गये | अब उन मिटटी के दियो में उन्होंने पानी भरा और बाती जला दी | वो दिया मध्यरात्री तक जलता रहा |जब इसकी सुचना बनियों तक पहुची तो साईं बाबा के पास विपुल क्षमायाचना के लिए आये | साईं बाबा ने उन्हें क्षमा करदिया और कहा कि दुबारा झूठ मत बोलना | इस तरह साईं बाबा ने अपना चमत्कार दिखाते हुए पानी से दिया जला दिया |डूबती बच्ची को बचाना Saving a child from drowning
एक बार बाबु नामक व्यक्ति की तीन साल की बच्ची कुंवे में गिर गयी और डूबने लगी | जब गाँव वाले कुए के पास दौड़े उन्होंने देखा बच्ची हवा में लटक रही थी जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे पकड़ रखा हो और उसे उपर तक खीच लिए |साईं बाबा को वो बच्ची बहुत प्यारी थी जो अक्सर कहा करती थी “मै बाबा की बहन हु ” | इस घटना के बाद गाँव वालो ने कहा “ये सब बाबा की लीला है “| इसके अलावा इस चमत्कार को ओर कोई स्पष्टीकरण नही हुआ था |बारिश रोकना Stopping the rain
एक बार राय बहादुर नाम का व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ साईं बाबा के दर्शन के लिए शिरडी आया | जैसे ही वो पति पत्नी बाबा के दर्शन करवापस जाने लगे ,मूसलाधार बारिश शुरु हो गयी | जोरो से बिजलिया कडकने लगी और तूफ़ान चलने लगा | साईं बाबा ने प्रार्थना की “हे अल्लाह , बारिश को रोक दो , मेरे बच्चे घर जा रहे है उन्हें शांति से घर जाने दो ” | उसके बाद बारिश बंद हो गयी और वो पति-पत्नी सकुशल घर पहुच गये |अंतिम दिन
मंगलवार १५ ओक्टोम्बेर १९१८ विजयदशमी का दिन था साईं बाबा बहूत कमजोर हो गये थे . रोज की तरह भक्त उनके दर्शन के लिए आ रहे थे
साईं बाबा उन्हें प्रसाद और उड़ी दे रहे थे भक्त बाबा से ज्ञान भी प्राप्त कर रहे थे पर किसी भक्त ने नही सोचा की आज बाबा के शरीर का अंतिम दिन है .
सुबह की ११ बज गयी थी .
दोपहर की आरती का समय हो गया था और उसकी त्यारिया चल रही थी कोई देविक प्रकाश बाबा के शरीर में समां गया
आरती सुरु हो गयी और बाबा साईं का चेहरा हर बार बदलता हुआ प्रतीत हुआ . बाबा ने पल पल में सभी देवी देवताओ के रूप के दर्शन अपने भक्तो को कराये वे राम शिव कृष्णा वितल मारुती मक्का मदीना जीसस क्राइस्ट के रूप दिखे
आरती पूर्ण हुई .
बाबा साईं ने अपने भक्तो को कहा की अब आप मुझे अकेला छोड़ दे .
सभी वहा से चले गये साईं बाबा के तब एक जानलेवा खांसी चली और खून की उलटी हुई . तात्या बाबा का एक भक्त तो मरण के करीब था वो अब ठीक हो गया उसे पता भी न चला की वो किस चमत्कार से ठीक हुआ है वह बाबा को धन्यवाद देने बाबा के निवास आने लगा पर बाबा का सांसारिक शरीर तो येही रह गया था .
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